Sun, 12 Jun 2022

किसानों ने समय से पहले की कपास की बुवाई, महाराष्ट्र में रकबा बढ़ने की हो रही चर्चा

किसानों ने समय से पहले की कपास की बुवाई, महाराष्ट्र में रकबा बढ़ने की हो रही चर्चा

इस साल महाराष्ट्र में कपास को रिकॉर्ड रेट मिलता देख किसानों (Farmers) ने इसकी खेती पर जोर दिया है. कृषि विभाग ने इस बार खरीफ सीजन में कपास और सोयबीन की बुवाई को लेकर किसानों से अपील की थी कि समय से पहले खेती न करें, इसलिए प्रशासन ने समय से पहले बीजों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था. कपास के बीजों की बिक्री पर 31 मई तक रोक थी, लेकिन नांदेड़ जिले में किसानों ने कपास (Cotton) की बुवाई मई में ही कर ली है. ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि प्रशासन के नियमों की अनदेखी करते हुए कैसे इस जिले में पहले ही बुवाई हो गई? इस मुद्दे पर जिले के किसानों का कहना है यहां जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, उन्होंने पहले बुवाई की है. वहीं अन्य जिलों के मुकाबले यहां पानी की उपलब्धता भी अधिक है. यहीं कारण है कि किसानों ने पहले कपास की बुवाई कर ली.

कृषि जानकारों का कहना है कि अगर पर्याप्त बारिश हो जाए तो किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई जल्दी ही कर लेनी चाहिए. कपास पर उच्च दर मिलता देख जिले में किसानों ने समय से पहले ही कपास की खेती कर दी. उनकी कोशिश खरीफ सीजन से ज्यादा से ज्यादा उत्पादन हासिल करने की है. हालांकि जिले में बारिश देरी से शुरू हो रही है और किसानों ने समय से पहले कपास की खेती की है. ऐसे में कीट का खतरा बढ़ने का डर है. अब देखना होगा कि किसानों का प्रयोग सफल होता है फसल पर कीटों का हमला हो जाता है.

इस साल कपास के रकबे में होगी बढ़ोतरी
इस साल कपास उत्पादन में गिरावट की वजह से रिकॉर्ड दर मिलने से किसानों को राहत मिली है. सीजन के अंतिम चरण में किसानों को कपास का 14,000 रुपए प्रति क्विंटल तक का रेट मिला है. इसके अलावा कपास की मांग अभी भी अधिक है, इसलिए किसानों ने मई के अंतिम चरण में बढ़ी हुई दरों का लाभ उठाने के लिए कपास की बुवाई की है और अब फसल फल-फूल रही है. इसके अलावा, कृषि विभाग का अनुमान है कि इस साल खरीफ सीजन में सोयाबीन के बाद कपास का रकबा भी बढ़ेगा. नांदेड़ समेत उस्मानाबाद, लातूर, हिंगोली और बीड जिलों में कपास का रकबा बढ़ने की उम्मीद है.

बढ़ी हुई दरों का लाभ लेने का किसानों का प्रयास
कपास का सीजन खत्म होने के बाद भी भाव जस के तस बने हुए हैं. इसके अलावा, बाजार में कपास की कमी और बढ़ती मांग के कारण इस साल भी कीमतें औसत से अधिक रहने की उम्मीद हैं. हालांकि सीजन की शुरुआत में बढ़ती कीमतों का फायदा उठाने के लिए किसानों ने सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कपास की पहले ही बुवाई कर ली है. अब अगर समय से बारिश होती है तो पैदावार में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी.

अन्य फसलों पर भी कीटों का खतरा
नांदेड़ जिले के किसान अभी भी कपास की बुवाई कर रहे हैं. लेकिन परिणाम भविष्य में देखने को मिल सकता है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि गुलाबी सुंडी कीट न केवल कपास की फसलों पर बल्कि अन्य फसलों को भी प्रभावित करते हैं. यहीं कारण है कि कृषि विभाग ने अन्य सभी फसलों को कपास से अलग बुवाई करने की अपील की थी.