Mon, 20 Jun 2022

भुसावल मंडी में बिकने आया सिर्फ 41 क्विंटल प्याज, फिर भी 10 रुपये किलो, क्या करें किसान?

भुसावल मंडी में बिकने आया सिर्फ 41 क्विंटल प्याज, फिर भी 10 रुपये किलो, क्या करें किसान?

प्याज की खेती करने वाले महाराष्ट्र के किसान पिछले कुछ महीने से खासे परेशान हैं. क्योंकि उन्हें कहीं 50 पैसे, कहीं 75 पैसे, कहीं 1 और 5 रुपये प्रति किलो के रेट पर प्याज बेचना पड़ रहा है. अधिकतम दाम 15 रुपये तक है. जो कि उत्पादन लागत से कम है. व्यापारी तर्क दे रहे हैं कि इस साल रिकॉर्ड पैदावार हुई है. इसलिए मंडियों में आवक ज्यादा हो रही है. जिसकी वजह से किसानों (Farmers) को इतना कम दाम मिल रहा है. लेकिन, किसानों का कहना है कि ज्यादा आवक और पैदावार का तर्क बेतुका है. यह ज्यादा लाभ कमाने के लिए व्यापारियों का खेल है. किसानों के आरोप रविवार को सही साबित होते दिखाई दिए. जबकि कई मंडियों में बहुत कम आवक के बावजूद प्याज के दाम (Onion Price) में वृद्धि नहीं हुई.

भुसावल (BHUSAVAL) में रविवार को सिर्फ 41 क्विंटल प्याज की आवक हुई. इसके बावजूद किसानों को प्याज का अधिकतम दाम 10 रुपये किलो ही मिला. पुणे के पिंपरी मंडी में सिर्फ 15 क्विंटल प्याज की आवक हुई. इसके बावजूद यहां किसानों को न्यूनतम भाव 10 रुपये, औसत दाम 11.5 और अधिकतम रेट 13 रुपये प्रति किलो ही मिला. प्याज के आवक की यह जानकारी किसी किसान ने नहीं दी है. बल्कि महाराष्ट्र स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड से मिली है.

महाराष्ट्र की किस मंडी में कितना है प्याज का दाम?
पुणे की खडकी वेजीटेबल मंडी में 19 जून को महज 34 क्विंटल प्याज की आवक हुई. इसके बावजूद न्यूनतम रेट 7 रुपये किलो से ज्यादा नहीं मिला. औसत दाम 10 और अधिकतम 13 रुपये किलो रहा.
अहमदनगर की अकोले मंडी में रविवार को कुल 2201 क्विंटल प्याज की आवक हुई. यहां न्यूनतम दाम 1.25 रुपये किलो हो गया.
अहमदनगर की पारनेर मंडी में 2346 क्विंटल की आवक हुई. यहां न्यूनतम दाम 2 रुपये किलो जबकि औसत रेट 11.25 रुपये किलो रहा.
अहमदनगर की राहाता मंडी में भी किसानों को प्याज रेट सिर्फ 2 रुपये किलो मिला. यहां पर औसत दाम 11.5 रुपये किलो मिला.
कम दाम के कारण संकट में हैं महाराष्ट्र के 15 लाख किसान
महाराष्ट्र कांदा उत्पादक संगठन के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोले का कहना है कि महाराष्ट्र (Maharashtra) में कम से कम 15 लाख किसान प्याज की खेती से जुड़े हुए हैं. उनकी आजीविका इसी की खेती पर निर्भर है. जब किसानों को अच्छा दाम मिलना शुरू होता है तो सरकार या तो प्याज इंपोर्ट करवा लेती है या फिर कोई कोशिश करके उसका दाम नीचे ले आती है.

लेकिन, जब किसानों को 1 रुपये किलो या कुछ पैसे किलो पर प्याज बेचना पड़ रहा है तो किसानों की मदद के लिए न तो कोई अधिकारी आ रहा है और न तो कोई नेता. अच्छा होता कि सरकार कम से कम लागत मूल्य पर कुछ मुनाफा देकर किसानों से प्याज खरीद लेती. इस समय 16 से 18 रुपये किलो तक की लागत आ रही है.

बिचौलियों पर कब होगी कार्रवाई?
दिघोले का कहना है कि प्याज की ट्रेडिंग करने वाली लॉबी बहुत मजबूत है. इसमें बड़े नेताओं का कारोबार ज्यादा है. ये ट्रेडर इस समय सस्ता प्याज लेकर स्टोर कर रहे हैं. दो महीने बाद यही लोग काफी महंगा प्याज बेचेंगे. इससे न तो किसान का फायदा होगा और न तो उपभोक्ताओं का. इसलिए सरकार से अपील है कि वो मुनाफाखोर व्यापारियों और प्याज के बिजनेस का खेल खेलने वालों पर कार्रवाई करे. जिस दिन सरकार बिचौलियों और मुनाफाखोरों पर शिकंजा कस देगी उसी दिन किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को राहत मिल जाएगी.