Wed, 13 Jul 2022

दुष्कर्म के बाद अगर आरोपी बच्चे का पिता नहीं निकला तो क्या बलात्कार आरोप से मुक्त हो जायेगा' सुप्रीम कोर्ट का DNA जांच से इंनकार ​​​​​​

दुष्कर्म के बाद अगर आरोपी बच्चे का पिता नहीं निकला तो क्या बलात्कार आरोप से मुक्त हो जायेगा' सुप्रीम कोर्ट का DNA जांच से इंनकार

नई दिल्लीः नाबालिग लड़की के साथ हुए बलात्कार के दौरान पैदा हुए बच्चे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने डीएनए जांच का आदेश देने से साफ इनकार कर दिया है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि  मामले में बच्चे के पिता की पहचान अप्रासंगिक है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ एवं न्यायमूर्ति एस एस बोपन्ना की पीठ ने बलात्कार के आरोपी मोहम्मद सलीम की याचिका खारिज कर दी। सलीम के खिलाफ सुनवाई किशोर न्यायालय में चल रही है। इससे पहले किशोर न्यायालय ने भी डीएनए जांच के आग्रह को ठुकरा दिया है।

पीठ ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) के अपराध अंतर्गत पिता की पहचान प्रासंगिक नहीं है। अगर वह बच्चे का पिता नहीं होगा तो क्या तो वह बलात्कार के आरोप से मुक्त हो जायेगा। हम बिना विचार किए बच्चे की डीएनए जांच की अनुमति नहीं दे रहे। 

दरअसल, आरोपी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता राम भदौरिया ने कहा कि सलीम ने 25 जून 2021 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, जिसने सुलतानपुर सत्र अदालत के फैसले को पलट दिया था। सुलतानपुर सत्र अदालत ने बच्चे की डीएनए जांच कराने का आदेश दिया था।  

वहीं, आरोपी ने कहा कि उस पर जबरन आरोप लगाया जा रहा है कि वह बच्चे का पिता है। याचिका में कहा गया है कि आरोप है कि FIR दर्ज होने की तारीख से सात महीने पहले किशोर आरोपी ने नाबालिग लड़की के साथ उसके परिवार वालों के सामने ही रेप किया था। बताया गया है कि पीड़ित एवं आरोपी, दोनों का परिवार एक ही गांव में रहता है और एक दूसरे के पड़ोसी है।