Thu, 14 Jul 2022

मोहन भागवत बोले- दूसरों की रक्षा करना ही मनुष्य धर्म है

मोहन भागवत बोले- दूसरों की रक्षा करना ही मनुष्य धर्म है

देश में जनसंख्या वृद्धि को लेकर छिड़ी बहस के बीच संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ा बयान दिया है। मोहन भागवत ने कहा है कि सिर्फ खाना और आबादी बढ़ाना पशुओं का काम है। मनुष्य की निशानी दूसरों की रक्षा करना है। मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कई मुद्दों पर विस्तार से बात की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि शक्तिशाली ही जिंदा रहेगा, यह जंगल का नियम है। लेकिन जब शक्तिशाली दूसरों की रक्षा करने लगे तो यह मनुष्य की निशानी है। उन्होंने कहा कि सिर्फ खाना और आबादी बढ़ाना यह काम तो जानवर भी कर सकते हैं। मनुष्य के कई कर्तव्य होते हैं, जिनका निर्वाहन उन्हें समय-समय पर करते रहना चाहिए। 

मोहन भागवत ने कहा कि मनुष्य के पास अगर बुद्धि नहीं होती तो वो पृथ्वी पर सबसे कमजोर प्राणी होता। लेकिन कभी संज्ञानात्मक आवेग मनुष्य के जीवन में आया जिसने उसे सर्वश्रेष्ट बनाया मगर केवल खाना-पीना और प्रजा बढ़ाना, ये काम तो पशु भी करते हैं। उन्होंने कहा कि जो ताकतवर है वो जीवन जी लेगा, यह जंगल का कानून है लेकिन मनुष्यों की व्याख्या है कि सबसे योग्य व्यक्ति दूसरों को जीने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि देश के आगे बढ़ने के संकेत अब हर तरफ नजर आ रहे हैं। चिकबल्लापुरा जिले के मुद्देनहल्ली में सत्य साईं ग्राम स्थित ‘श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी फॉर ह्यूमन एक्सीलेंस’ के पहले दीक्षांत समारोह के दौरान भागवत ने कहा कि अगर किसी ने 10-12 साल पहले कहा होता कि भारत आगे बढ़ेगा तो हम इसे गंभीरता से नहीं लेते।’’ 

संघ प्रमुख ने कहा कि राष्ट्र की प्रक्रिया तत्काल शुरू नहीं हुई, यह 1857 से है, जिसे स्वामी विवेकानंद द्वारा आगे बढ़ाया गया। संघ प्रमुख ने कहा कि आध्यात्मिक साधनों के जरिये उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है क्योंकि विज्ञान अभी तक सृष्टि के स्रोत को नहीं समझ पाया है। भागवत ने कहा कि मौजूदा विज्ञान में बाहरी दुनिया के अध्ययन में समन्वय और संतुलन का अभाव है, जिसके परिणामस्वरूप हर जगह विवाद की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने कहा कि अगर आपकी अलग है, तो विवाद है। अगर आपकी पूजा पद्धति अलग है, तो विवाद है और अगर आपका देश अलग है, तो विवाद है। विकास और पर्यावरण तथा विज्ञान और अध्यात्म के बीच विवाद है। कुछ इस तरह पिछले 1,000 साल में दुनिया आगे बढ़ी है।