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अगर हो मोटे तो हो जाओ खुश, मिलेंगे अवॉर्ड, इन लोगों का वजन हाथी के बच्चे से भी ज्यादा, पर

हर कोई एक स्वस्थ शरीर की चाह रखता है | एक तरफ कहा जाता है की इंसान खाने के लिए ही तो कमाता है पर जब मोटापे की बात आती है तो लोग डाइटिंग शुरू कर देते है मतलब खाने में परहेज़ | यहां तक भी देखा गया है की कुछ लोग गुड़ लुकिंग दिखने के लिए साल साल तक रोटी तक भी नहीं खाते |

जो लोग मोटे है वह घबराईये मत ना ही अब निराश होने की जरूरत है आज हम आपका परिचय विश्व के उन लोगो से कराने जा रहे है जिनका वज़न बढ़ाना एक शोक है और इनका वज़न इतना है की इनको उठाने के लिए क्रेन तक मंगवानी पड़ जाती है और इन विशाल लोगो को अवार्ड्स भी प्राप्त है | मोटे होने पर इन्हे शर्मिन्दगी महसूस नहीं होती बल्कि ये भारीभरकम शरीर के साथ ख़ुशी से जीवन वियतीत कर रहे है |

पहले बलवान इंसान का नाम है जॉन ब्रोवर मिन्होक

ये वज़नदारी इंसान का नाम मोटे लोगो की सूचि में सर्वप्रथम है | इनका नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे मोटे इंसानो की सूचि में दर्ज है | 1978 में इन महाशिय का वज़न 635 किलोग्राम यानि की 1400 पौंड था | ज्यादा मोटापे के चलते 1983 इनकी मौत हो गई जब इन्हे संस्कार के लिए लेकर जाना था तब इनके घर की दिवार तोड़नी पड़ी थी जब जाकर इनके मृतक शरीर को बहार लाया गया था | जब उनका वज़न 798 पौंड था |

वाल्टर हडसन

मोटे लोगो की सूचि में दूसरा नाम आता है वाल्टर हडसन का इनका वज़न 544  किलोग्राम था | 1991 में दिल का दौरा पड़ने से इनकी मौत हो गई थी |

उस वक्त इनकी उम्र 44 की थी | जब इनकी मृत्यु हुई तब इनका वज़न 552 किलो था |

मैनुअल उरीबे

तीसरे स्थान पर आते है मैनुअल उरीबे | इनका जन्म 1965  में हुआ था | मैनुअल मैक्सिको शहर से थे | मैनुअल ने बताया था की 2001 से उनका शरीर बैड से उठने के लिए सक्षम नहीं था | जनवरी 2006 में, उरीबे ने ‘टेलीविज़न टीवी नेटवर्क’ के कार्यक्रम को प्रेरित किया था। उरीबे पर ‘वर्ल्ड हेवीएस्ट मैन’ नामक एक डॉक्यूमेंटरी भी बनाई गई है | 48 वर्ष के आयु में इनका देहांत हो गया था मरते वक्त इनका वज़न 1230 पौंड था |

रॉबर्ट बटलर

रॉबर्ट की मृत्यु 2015  में हो गयी थी | मोटापे का कारण बताते हुए रॉबर्ट ने बताया था की डिप्रेशन और खाने का आदी होने की वजह से वह इतने मोटे है | डॉक्टरो ने उनकी आर्थिक स्थिती को देखते हुए इनके सर्जरी नही की थी | अपनी इमारत से बाहर निकालने के लिए स्थानीय अग्नि विभाग ने क्रेन का सहारा लिया था और उन्हें उनके घर भेजने के लिए एक रैंप तैयार कराना पड़ा |

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