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श्रीलंका में देखने को मिलेंगे ये हिन्दू मंदिर…

श्री लंका दुनिया का वह देश जिसमें आज भी भारत देश से जुड़े कुछ तत्व प्राप्त होते हैं शायद यही कारण है कि इस देश में बहुत से हिन्दू मंदिर आज भी मौजूद है| श्री लंका वासियों का इन मंदिरों के प्रति उतना ही सम्मान है जितना कि हिन्दुओं धर्म के लोगों का उन मंदिरों के प्रति है| श्री लंका के कुछ मुख्य हिन्दू मंदिरों का वर्णन इस प्रकार है|

1) मुन्नेस्वरम मंदिर, मुन्नेस्वरम , श्रीलंका

भगवान शिव के दुनिया भर में अनेक मंदिर हैं| इन्ही में से एक मंदिर श्री लंका मुन्नेस्वरम में भी बना हुआ है| इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका इतिहास रामायण से जुड़ा हुआ है| हिन्दू धर्म के इस पवित्र स्थल पर कुल पांच मंदिर बने हुए हैं| जिसमें से सबसे भव्य एवं अति खूबसूरत मंदिर भगवान शिव का बना हुआ है| हिन्दू मान्यताओं के अनुसार भगवान राम ने जब रावण का वध किया था उसके बाद मुन्नेस्वरम में इसी स्थान पर आकर उन्हों ने शिव भगवान की आराधना की थी| इस मंदिर से जुड़ी एक और हैरान करने वाली बात सुनने में आई है कि पुर्तगालियों ने दो बार इस मंदिर को भारी नुकसान पहुंचाने की भी कोशिश की थी|

2) कोणेश्वरम मंदिर, तिरिकोनामलाई, श्रीलंका
कोणेश्वरम मंदिर जिसे दक्षिण कैलाशा भी कहा जाता है| श्री लंका का यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित किया गया है| धार्मिक स्थल होने के साथ साथ यह एक मशहूर पर्यटन स्थल भी है| इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण लंका पति रावण ने करवाया था| कोणेश्वरम मंदिर की खास बात यह है कि दुनिया का केवल एक ऐसा मंदिर है जिसमें भगवान से ज्यादा राक्षस रावण की प्रतिमायें मौजूद हैं| यह देश भर के प्राचीन मंदिरों में से एक प्रमुख मंदिर हैं|

3) सीता अम्मन मंदिर, नुवारा एलिया
श्री लंका की इस धरती पर माता सीता अम्मन नाम का यह एक मुख्य मंदिर है| इस मंदिर को जिस भी नजरिये से देखा जाये यह बहुत ही ख़ास और अद्भुत है| यह मंदिर श्री लंका के नुवारा एलिया नामक जिले में मौजूद है जो कि समुद्र तल से 6200 फुट पर स्थित है| इस मंदिर को दक्षिण भारतीय शैली के रूप में बनाया गया है| इस ऐतिहासिक मंदिर के बारे में कहा जाता है कि मंदिर में विराजित प्रतिमायें पांच हजार वर्ष पुरानी हैं| प्रकृति से घिरे इस मंदिर के पीछे एक झरना और एक ऊँची पहाड़ी है| इस मंदिर से जुड़ी एक रोचक बात यह है कि सीता अम्मन मंदिर के अलावा यहां और भी बहुत से मंदिर हैं पर केवल इस मंदिर में ही बंदरो के दल देखने को मिलते हैं एवं अगर उन बंदरों को ध्यान पूर्वक देखा जाये तो उनकी पूंछ काले रंग की दिखाई पड़ती हैं| मंदिर परिसर के अगले भाग से लेकर के पिछले भाग तक हनुमान भगवान की अनेक मूर्तियां देखने को मिलेंगी| मंदिर में स्थित जलकुंड के पास चट्टानों पर पैरों के कुछ निशान भी देखने को मिलते हैं जिन्हें भगवान हनुमान जी के पवित्र पैरों के रूप में देखा जाता है| उन पैरों को विशेष रूप से आकर्षित करने के लिए लाल और पीले रंग से मुख्य प्रकाश डाला हुआ है| मंदिर और पहाड़ी के बीच एक पुल भी बना हुआ है , जिसके नीचे अविरल झरना बहता है| मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को इसी पुल से होकर गुज़रना पड़ता है| इस मंदिर में पूजा के लिए महीने का एक दिन निश्चित किया गया है| उस दिन लोगों चहल पहल अधिक देखने को मिलती है|

4) नागा पूषानी अम्बल मंदिर, श्री लंका
हिन्दुओं के श्री लंका में बहुत से मंदिर है जिनमें से एक पावन स्थल है जिसे नागा पूषानी अम्बल मंदिर| इस प्राचीन मंदिर को माता पार्वती जी को समर्पित किया गया है| 1620 में इस मंदिर को पुर्तगालियों द्वारा नष्ट कर दिया गया था बाद में इसकी संरचना दोबारा 1720 से 1790 के बीच में की गयी| इस महान मंदिर में तकरीबन हजार लोग हर रोज आते हैं और उत्सव वाले दिन यह संख्या बढ़ कर पांच हजार हो जाती है| इस मंदिर की ख़ास बात यह कि इसमें अनुमानित दस हजार मूर्तियां हैं| मंदिर के प्रवेश द्वार को बड़ी ही ख़ूबसूरती से सजाया गया है| आस्था के प्रतीक इस मंदिर में विशेष रूप से शिवरात्रि, नवरात्रि आदि बड़े त्यौहार मनाये जाते हैं|

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