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जाने, क्या है कागज़ का इतिहास ?

कागज़ का आगाज एक बहुत ही अमूल्य  परिवर्तन है। आज कागज़ हमारे जीवन का एक अटूट हिस्सा बन गया है। हम कागज़ का इस्तेमाल हर चीज़ में करते है किताब, समाचार पत्र, टिश्यू पेपर, आदि। पर क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि कागज़ कब  और किसने आविष्कार किया? माना जाता है कि पेपर का इतिहास बहुत ही लम्बा और दिलचस्प है। पेपर का आविष्कार लग भग दूसरी शताब्दी में हुआ था।

पेपर का आविष्कार

यह कह पाना मुश्किल है कि कागज़ का किसने आविष्कार किया था क्योंकि जो कागज़ आज हम प्रयोग करते है वो वास्तविकता में जब खोजा गया था तब ऐसा नहीं था। कागज़ को कई बदलाव से गुज़ारना पढ़ा।

कागज़ शब्द एक प्राचीन मिस्र शब्द ‘पेपिरस’ से निकला गया है जो कि उस पदार्थ का नाम है जिस से कागज़ का आविष्कार हुआ था। पेपिरस नामक पदार्थ पेड़ के तने में पाया जाता है। यह पदार्थ आम तौर पर मिस्र या यूनान में उत्पाद किया जाता है। पर पेपर आविष्कार सब से पहले चीन में देखा गया था लग भग 105 एडी में परन्तु यह बात जानना दिलचस्प है कि पेपर के आविष्कार से भी कई वर्ष या यूं कह लें कई शताब्दियों पहले से लोग लिख रहे थे और मनुष्य अलग अलग वस्तुओं पर लिख रहे थे या कभी कभी तराश रहे थे पर मनुष्य ने अपने सन्देश और विचारों के संपादन का जरिया निकाल लिया था। शुरुआत में मनुष्य पत्थर, चिकनी मट्टी, लकड़ी, चमड़ा और रेशम का इस्तेमाल किया करते थे जिस पर वो तराशा करते थे व मिस्र के लोग चमड़े के कागज़ का इस्तेमाल किया करते थे जो अक्सर गाय या बकरी का चमड़ा हुआ करता था। परन्तु चीन में लम्बी लम्बी बम्बू से बनी पत्रिकाओं पर लिखा जाता था जिसे बाद में जोड़ कर किताब का आकार दिया जाता था। परन्तु ऐसा लिखने से अक्सर हस्तलिपियाँ खो जाया करती थी, इन्हें संभालना भी मुश्किल था क्योंकि यह बहुत भारी हुआ करती थी और रेशम का धागा बहुत महंगा हुआ करता था। इसलिए इसका कोई उपाय निकालना आवश्यक बन गया।

प्रारंभ में दूसरी शताब्दी के दौरान  चीन के दस्तावेज़ों में पेपर बनाने की प्रक्रिया पायी गयी थी । चीन में पेपर बनाने की प्रक्रिया का आविष्कार त्साई लून ने किया था। इनकी प्रक्रिया में पहले मलबेरी के पत्तों को कपास के साथ पानी में भिगो दिया जाता था फिर उसका गूदा बना कर उसको लम्बी लम्बी पत्रिकाओं का आकार दे दिया जाता था जिनको फिर सूरज के किरणों में सुखाया जाता था। इसी प्रक्रिया से फिर धीरे धीरे अलग अलग प्रकार के कागज़ों का आविष्कार हुआ। इस दौरान ही चीन ने मौद्रिक प्रणाली का प्रचलन शुरू किया और इसी पेपर से पैसों की राशियां बनानी शुरू की और देखते ही देखते यह प्रचलन पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो गया। फिर पेपर बनाने का काम यूरोप में भी शुरू हो गया किन्तु यूरोप में पेपर बनाने की प्रक्रिया थोड़ी अलग थी यहाँ पेपर मशीन द्वारा बनाया जाता था। पेपर बनाने की मशीन का आविष्कार निकोलस-लुइस रॉबर्ट्स ने मिलकर किया था। इनकी मशीन आज पेपर बनाने का आधार बन गयी है। मशीन द्वारा अधिशेष में पेपर बनता देख इसकी मांग बढ़ गयी थी। फिर दूसरा बदलाव आया जब कपास को लकड़ी के गूदे से बदल दिया गया। बीसवीं शताब्दी तक पेपर बनाने के लिए केवल लकड़ी के गूदे का प्रयोग होने लगा और देखते ही देखते सभी पेपर उद्योग ने अपने पेड़ लगाने शुरू कर दिए। अब पूरी प्रक्रिया स्वचालित हो गयी और हर जगह पेपर का इस्तेमाल होने लगा जैसे कि पत्रिकाएं, समाचार पत्र, किताब, आदि।

आधुनिक पेपर बनाने की प्रक्रिया

लकड़ी के तनों को काट कर अलग करने की मशीन में डाला जाता है। जिसे फिर छोटे छोटे टुकड़ों में काट दिया जाता है।

उन टुकड़ों को फिर बड़े बायलर में डाला जाता है जहाँ इनका गूदा बनाया जाता है फिर उस गूदे को पानी से अलग करने के लिए बड़ी बड़ी छलनियों में रखा जाता है।

उस गूदे को फिर जो कि अब बहुत सख्त हो चूका होता है बड़े बड़े सैलंडरों में से गुज़ारा जाता है ताकि वो ठीक मोटाई अनुसार फैल जाए और पत्रिकाओं के आकार में आ जाए।

पेपर को ठीक बनावट और मज़बूती देने के लिए उसे स्टार्च घोल से नहलाया जाता है ताकि वह लिखते समय या छपाई के समय ज़्यादा स्याही ना सोख लें।

निष्कर्ष

यह जानना तो बहुत दिलचस्प है कि जो कागज़ आज हम इस्तेमाल करते है वो कैसे बना परन्तु हमें यह भी जान लेना चाहिए कि पेपर बनाने की प्रक्रिया के दौरान कितने पेड़ काटे जाते हैं और इससे हमारी प्रकृति को क्या क्या हानियां हैं। एक पेड़ काटने पर एक 35 कागज़ों वाली पत्रिका बनती है। तो सोंच लीजिए की आपने अपने जीवन में कितनी पत्रिकाएं पढ़ी हैं और उन पत्रिकाओं को बनाने के लिए कितने पेड़ों को काटा गया है। इसलिए हमेशा याद रखें कि हमें हर कागज़ का पूर्ण उपयोग करना चाहिए।  

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