Fri, 3 Dec 2021

पैदा करने k कारण ठोका डॉक्टर पर मुकदमा? अब मिला लाखों का मुहावजा ..जानिए क्या है मामला

पैदा करने k कारण ठोका डॉक्टर पर मुकदमा? अब मिला लाखों का मुहावजा ..जानिए क्या है मामला

एक महिला ने अपनी मां के डॉक्टर पर बड़ी ही अजीबोगरीब वजह से केस किया था। महिला का दावा था कि उसे ‘पैदा नहीं होना चाहिए’ था। अब महिला ने यह केस जीत लिया है और मुआवजे के तौर पर उसे कई मिलियन डॉलर का भुगतान किया जाएगा। ब्रिटेन की स्टार शोजम्पर एवी टॉम्ब्स ने ‘स्पाइना बिफिडा’ के साथ पैदा होने के कारण अपनी मां के डॉक्टर के खिलाफ केस किया था। स्पाइनल डिफेक्ट का मतलब है कि एवी को कभी-कभी ट्यूबों के साथ 24 घंटे बिताने पड़ते थे।

 

‘द सन’ की रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है। 20 वर्षीय महिला ने गर्भवती होने के दौरान अपनी मां को ठीक से सलाह देने में विफलता के लिए डॉ फिलिप मिशेल को अदालत ले गईं। एवी टॉम्ब्स का दावा है कि अगर डॉ मिशेल ने उनकी मां को बताया होता कि अपने बच्चे को प्रभावित करने वाले स्पाइना बिफिडा के जोखिम को कम करने के लिए उन्हें फोलिक एसिड की खुराक लेने की जरूरत है, तो वह गर्भवती नहीं होती।

सही सलाह मिलती तो टाल देंती प्रेग्नेंसी
इसका मतलब यह होता कि एवी कभी पैदा नहीं होतीं। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार जज रोसलिंड कोए क्यूसी ने बुधवार को लंदन हाई कोर्ट में दिए अपने ऐतिहासिक फैसले में एवी का समर्थन दिया। जज ने फैसला सुनाया कि अगर एवी की मां को ‘सही सलाह दी गई होती तो वह गर्भवती होने के प्रयासों में कुछ देर करतीं।’ उन्होंने एवी को एक बड़े मुआवजे का अधिकार देते हुए कहा कि परिस्थितियों के अनुसार कुछ समय बाद वह गर्भवती होतीं और परिणामस्वरूप एक सामान्य और स्वस्थ बच्चा पैदा होता।कोर्ट कर सकती है बड़े मुआवजे का ऐलान

एवी के वकीलों ने कहा है कि फिलहाल सटीक राशि का पता नहीं चला है। लेकिन इस भुगतान के बड़े होने की प्रबल संभावना है क्योंकि उसे इसकी जरूरत अपनी आजीवन देखभाल करने के लिए होगी। एवी की मां ने पहले कोर्ट को बताया था कि अगर डॉ मिशेल ने उन्हें सही सलाह दी होती तो वह गर्भवती होने की अपनी योजना को टाल देंती।

 

उन्होंने कहा कि मुझे सलाह दी गई थी कि अगर मैं अच्छी डाइट लेती हूं, तो मुझे फोलिक एसिड नहीं लेना पड़ेगा। इस फैसले को एक अहम निर्णय माना जाता है क्योंकि इसका मतलब है कि एक डॉक्टर को गलत पूर्व-गर्भधारण सलाह के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है अगर इसका असर नवजात शिशु पर पड़ता है।