Mon, 1 Aug 2022

मोबाइल पर गेम खेलने की लत कर रही बच्चों को बर्बाद, मानसिक बिमारियों से हो रहे ग्रस्त

मोबाइल पर गेम खेलने की लत कर रही बच्चों को बर्बाद, मानसिक बिमारियों से हो रहे ग्रस्त

रोहतक।  आजकल हर घर में स्मार्टफोन है और ज्यादातर बच्चे स्मार्टफोन की लत का शिकार हैं। जब से आनलाइन क्लासें चलनी शुरू हुई हैं तो बच्चों को सबसे ज्यादा लत स्मार्टफोन की लगी है। स्मार्टफोन के कारण बच्चों का शारीरिक विकास ठीक से नहीं हो रहा है। डॉक्टर कहते हैं बचपन में हम जिस तरह की चीजें ज्यादा देखते, सुनते और पढ़ते हैं, उसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बच्चों की मोबाइल फोन पर अधिक समय बिताने की आदत को कई तरह से हानिकारक मानते हैं। मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से मस्तिष्क और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।


मोटीवेटर एवं जिला अर्श काउंसलर ने बताया कि बच्चों में नया सीखने की क्षमता अधिक होती है। बच्चे स्वाभाविक रूप से कुछ समझने की तुलना में चीजों को देखने में अधिक कुशल होते हैं। ऐसे में अगर बच्चा मोबाइल फोन पर ज्यादा समय बिता रहा है, साथ ही वह पबजी जैसे गेम पर ज्यादा समय बिताता है तो इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है। मोबाइल-वीडियो गेम का स्वभाव बच्चों पर अधिक प्रभाव डालता है क्योंकि गेम खेलते समय आपका पूरा ध्यान टास्क पर होता है। ऐसे में अगर इसकी प्रवृत्ति हिंसक, पिटाई, गोली चलाने की हो तो यह बच्चे के मन को उसी के अनुसार बदलने लगती है।

रोजाना घंटों मोबाइल में ऐसे गेम्स पर समय बिताने से बच्चे इसके आदी हो जाते हैं। वे उस खेल के बिना नहीं रह सकते, जिसके दौरान जो कोई भी उन्हें उस खेल से दूर भगाने की कोशिश कर रहा है, वह बच्चों का दुश्मन बन जाता है।  बच्चों को इस तरह के विकारों से मुक्त रखने के लिए जरूरी है कि माता-पिता बच्चों की निगरानी करते रहें। आप देखते हैं कि बच्चे कैसा व्यवहार कर रहे हैं, वे किस तरह के खेल खेल रहे हैं, वे दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं।


इसके अलावा मोबाइल पर ज्यादा समय बिताने वाले बच्चों में नींद की कमी और नींद की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याएं ज्यादा देखी गई हैं। सेल फोन से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन के उत्पादन में बाधा डालती है। मेलाटोनिन वह हार्मोन है जो नींद-जागने के चक्र को नियंत्रित करता है।  जब यह हार्मोन असंतुलित हो जाता है तो इससे नींद संबंधी विकारों की शिकायत बढ़ जाती है।   नींद की कमी कई तरह की गंभीर बीमारियों का कारक है।


बच्चों सहित सभी आयु वर्ग के लोगों में मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल को मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी हानिकारक मानते हैं। डॉ.संदीप जांगड़ा ने कहा कि पहले के जमाने में बच्चे बाहर खेलते थे, प्रकृति से जुड़ाव रखते थे, एक-दूसरे से मिलते थे। वहीं अब मोबाइल ने इन सभी आदतों को सीमित कर दिया है, ऐसे में बच्चों में कई तरह की मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं विकसित होने लगी हैं। यही कारण है कि आज के बच्चे एक दशक पहले के बच्चों की तुलना में अधिक आक्रामक, झगड़ालू, सुस्त और बातूनी और चिड़चिड़े प्रवृत्ति के होते जा रहे हैं।


डॉ.संदीप जांगड़ा के मुताबिक माता-पिता कुछ आराम करने, बच्चों को खिलाने या बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल दे देते हैं। यह धीरे-धीरे बच्चों की लत बन जाती है, एक ऐसी लत जिसके बिना बच्चे नहीं रह सकते। पता ही नहीं चलता कि विश्राम के लिए विनाश की चाबी बच्चों के हाथ में रख दी है। मोबाइल ने बच्चों के जन्मजात स्वभाव को खत्म कर दिया है। बच्चे, बच्चे कम परिपक्व होते जा रहे हैं।  मसलन हमने अपने छोटे से आराम की तलाश में बच्चों से उनका बचपन छीन लिया है, इसके दुष्परिणाम आए दिन सामने आते रहते हैं।


बच्चों में शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उन्हें बाहर खेलने के लिए कहें। साथ ही बच्चों को अपने दोस्तों के साथ ज्यादा से ज्यादा समय आउटडोर गेम्स खेलने की सलाह दें। इससे बच्चे फोन को बिल्कुल मिस नहीं करेंगे और उनकी लत भी धीरे-धीरे छूटने लगेगी। दरअसल, दिन-रात इंटरनेट मीडिया पर आनलाइन रहने के कारण बच्चों की आंखों पर इसका असर पड़ रहा है। इसके साथ ही बच्चे गंभीर बीमारी का शिकार हो रहे हैं। इस ओर न तो अभिभावक कोई ध्यान दे रहे हैं और न ही बच्चों को खुद के स्वास्थ्य की चिंता है। 


बच्चों का ध्यान फोन और टीवी स्क्रीन से डायवर्ट करने के लिए उन्हें प्रकृति से प्रेम करना सिखाएं। इसके लिए बच्चों को समय-समय पर पेड़-पौधों, जानवरों और पक्षियों से जुड़े कुछ दिलचस्प फैक्ट बताते रहें। साथ ही बच्चों को आस-पास के पार्क और तालाब की सैर पर जरूर ले जाएं। ऑनलाइन क्लास और इंटरनेट के इस दौर में बच्चों ने किताबें हाथ में लेना लगभग छोड़ ही दिया है. ऐसे में बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करें। इसके लिए आप बच्चों को उनकी पसंद की स्टोरी बुक और कॉर्टून बुक गिफ्ट कर सकते हैं।


घर का काम करते समय बच्चों को भी ज्यादा से ज्यादा समय अपने साथ मशगूल रखने की कोशिश करें। घर में कपड़े सुखाने, कमरे की सफाई और किचन के छोटे-छोटे कामों में बच्चों की हेल्प लें। साथ ही काम करते समय बच्चों के साथ मस्ती करना ना भूलें। जिससे बच्चे न सिर्फ घर के कामों में आपका हाथ बटाएंगे बल्कि फोन से भी दूरी बनाना शुरू कर देंगे।