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अगर हिमाचल घूमने का बना रहे हैं प्लान, तो इन धार्मिक स्थलों पर जरूर जाएं, होंगी सभी इच्छाएं पूरी…

हिमाचल जो ऊँचे ऊँचे पहाडों के साथ बहुत ही खूबसूरत पर्यटक स्थल तो है ही साथ ही यह देवी देवताओं की भूमि भी है| अधिकतर प्राचीन मंदिर हिमाचल में ही हैं|

1) चिंतपूर्णी देवी, ऊना

माँ चिंतपूर्णी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के ऊना गाँव, के ऊना जिले में मौजूद है| इस स्थान पर माता सती के चरण गिरे थे| जिसके कारण यह 51 शक्ति पीठों में से एक है| चिंतपूर्णी देवी के इस स्थान पर जाने से प्रकृति का एक अलग ही खूबसूरत रूप देखने को मिलता है| इस स्थान पर पहुंचने के लिए रास्ते के मन-मोहक दृश्य लोगों को काफी प्रभावित करते हैं| यहां आने के बाद मन एक दम शांत और पवित्र महसूस करने लग जाता है| कहा जाता है कि चिंतपूर्णी देवी भक्तों की चिंता हर लेती है|

2) ज्वाला माता, कांगड़ा

ज्वाला देवी मंदिर हिमाचल के कांगड़ा में स्थित है| इस मंदिर को पांडवो द्वारा खोजा गया था| इस मंदिर की ख़ास बात यह है कि यहां माता की मूर्ति की नही बल्कि माता के ज्वाला रूप की पूजा की जाती है| माता के इस मंदिर का पहले निर्माण राजा भूमि चंद द्वारा किया गया था| परन्तु बाद में 1835 में इस मंदिर का पूर्ण निर्माण महाराणा रणजीत सिंह और राजा संसारचंद ने कराया था| इस स्थान को भी माता के 51 शक्ति पीठों में गिना जाता है| इस स्थान पर माता की जीभ गिरी थी| मंदिर के प्रवेश के साथ ही बायें हाथ पर अकबर नामक नहर है| इस नहर को अकबर ने बनवाया था| मंदिर के थोड़ी ऊपर एक और मंदिर है जिसे गोरख डिब्बी के नाम से जाना जाता है| ज्वाला माता मंदिर की चोटी पर सोने की परत चढ़ी हुई है|

3 ) तारादेवी मंदिर, शिमला

हिमाचल प्रदेश के राजधानी शिमला में है तारा देवी नाम का यह मंदिर| तारादेवी का यह मंदिर प्राचीन मंदिरों में से एक है| यह शिमला से 11 किलोमीटर की दूरी पर बनाया गया है| इस मंदिर का इतिहास 250 वर्ष पुराना है| माना जाता है कि राजा भूपेंद्र सेन ने माता के इस मंदिर का निर्माण किया था| राजा ने इस मंदिर को बनवाने के लिए अपनी ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा दान में दिया था| तारा देवी मंदिर हिमाचल की चोटी पर बना हुआ है इसके एक तरफ सड़क है और दूसरी तरफ घना जंगल| अपने स्वादिष्ट लंगर की वजह से भी यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है| क्योंकि अगर रविवार के दिन कोई यहां लंगर की सेवा देना भी चाहता है तो अगले छ वर्षो तक नही दे पायेगा| इस मंदिर से हिमाचल की वादियों को निहारा जा सकता है|

4) नैना देवी मंदिर, बिलासपुर

देवी का यह भव्य मंदि  शिवालिक पर्वत श्रेणी की पहाड़ियों पर स्थित है| एक मान्यता के अनुसार माता सती के नेत्र यहां गिरे थे, जिसके कारण इस स्थल को नैना देवी स्थल का नाम मिला| मंदिर में एक पीपल का पेड़ है जो लोगों का आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है| मंदिर तक पहुंचने के लिए अपने निजी वाहनों को भी ले जाया जा सकता है| साथ ही उड़्डनखटोले, पालकी आदि की भी व्यवस्था उपलब्ध है| मंदिर के पास ही एक गुफा भी है जिसे नैना देवी गुफा के नाम से जाना जाता है| नैना देवी में माता को भोग लगाने के लिए 56 व्यंजनों को तैयार कर के भोग लगाया जाता है| श्रावण अष्टमी को देवी के इस स्थल पर एक भव्य मेले का आयोजन भी किया जाता है|

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